१३ जनवरी २०२२ को प्रकाशित हास्यकवि गोपालप्रसाद व्यास जी के आलेख पर हिंदी से प्यार हैं समूह के पाठकों की प्रतिक्रियाए एवं स्वीकृति
१३ फरवरी २०२२ को प्रकाशित हास्यरसावतार गोपालप्रसाद व्यास जी के आलेख पर हिंदी से प्यार हैं समूह के पाठकों की प्रतिक्रियाएं एवं स्वीकृति
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डॉ. दिप्ति अमृतसर कॉलेज
आपने विस्तृत जानकारी बहुत ही अत्यंत सारगर्भित, ज्ञानवर्धक और सटीक और रोचक तरीके से प्रस्तुत की। आपको बधाई और धन्यवाद।
स्वीकृति सूर्या
आदरणीया डॉ दीप्ति जी
आलेख सरहाना की ख़ातिर आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
हरप्रीत सिंह
हास्य-कवि गोपाल प्रसाद व्यास जी सचमुच में बहुत मस्त
व्यक्तित्व के धनी थे। हम भाग्यशाली हैं कि हमने उन्हें जीवंत मंच से सुना। उनकी रचनाएँ श्रोताओं में सहज हास्य
उत्पन्न करने में सक्षम होती थीं। सूर्यकांत जी , आपने अपने आलेख में विस्तार से उनके जीवन और कृतित्व की
चर्चा की है । धन्यवाद ।
स्वीकृति सूर्या
महोदय हरप्रीत जी,
धन्य हुए यह जानकर की आप ने व्यास जी को जीवंत सुना है।
तब तो यह आलेख उनके जीवन परिचय के सामने फीका हो गया होगा। आपका अखंड आभार आलेख को
पसंद करके अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए।
विजय नगरकर
पंडित
गोपाल प्रसाद व्यास जी का विस्तृत परिचय दिया गया है। नारद जी खबर लाए है और
यत्र-तत्र-सर्वत्र को बहुत वर्षों पहले पढ़ा था। आज उनके महामूर्ख सम्मेलन की याद
आयी। सूर्यकांत जी ,हार्दिक बधाई, आपने उनके अनेक पक्षों को सामने रखा है। आप स्वयं एक सशक्त समीक्षक है।आपने
व्यास जी का सुंदर परिचय प्रस्तुत किया है।साधुवाद।
स्वीकृति सूर्या
जी विजय जी, बिल्कुल सही कहा आपने,
मैने भी जब महामूर्ख सम्मेलन के बारे में पढ़ा तब बहुत
अचरित हुवा। व्यास जी के बारे में लिखने के लिए बहुत कुछ है। उन पर एक किताब लिखी
जा सकती है।
आलेख पढ़कर आपकी शब्द सराहना के लिए हार्दिक आभार।
प्रगति टिपणीस
सूर्यकांत
जी, आपके आलेख को
पढ़ते समय मन में मुख्यतः रही, गोपाल प्रसाद व्यास जी के व्यक्तित्व और कृतित्व के
विभिन्न पक्षों को आपने बख़ूबी इस आलेख में समेटा है। उनकी हास्य कविताओं की
गुदगुदाहट की भी अनुभूति मिली और ओजपूर्ण रचनाओं का जोश भी महसूस किया। आपको इस
लेख के लिए बहुत-बहुत बधाई और आभार।
स्वीकृति सूर्या
प्रगति जी,
उनके काव्य हास्य के किस्से इतने है कि आलेख में लिखते
बैठते तो पूरा समूह हास्यमय हो जाता और शब्द सीमा समाप्त हो जाती। खैर, आपने व्यास
जी के व्यक्तित्व को पढ़ा और उन्हें हास्य व्यवहार से गुदगुदाहट हुई यही संतोषजनक
है। वैसे भी व्यास जी ने भी उनकी इच्छा यही व्यक्त की है कि उन्हें ज्यादा से
ज्यादा लोगो तक पढ़ा जाय और जीवन हसते खेलते व्यतित हो। आपका बहुत बहुत आभार जो
आपने इस आलेख को
सराहा।
विनिता कमबिरी
'हिंदी भाषा
शैली में व्यंग्य विनोद की नई धारा के जनक ' माने जाने वाले गोपाल जी का कितना सुंदर आलेख प्रस्तुत
किया है आपने सूर्यकांत जी। आपकी एक-एक पंक्ति मानो स्वयं ही रस की धार है। बहुत
बढ़िया।
स्वीकृति सूर्या
विनीता जी,
आलेख को पढ़कर आपकी समीक्षा भी लुभान्वित और आनन्दायक हो
गई है। यही जादू था गोपालप्रसाद जी के व्यंग, लेखन हास्य में। उनको पढ़कर पाठक भी हास्य को अपनी जीवन
मे उतरता है। आभार आपका
सृष्टि भार्गव
गोपालप्रसाद
व्यास के कृतित्व में बसे व्यंग्य, हास्य और ओज के रंगों को आपने बड़ी ही सहजता से शब्द दिए
है सूर्यकांत जी। उनके ब्रज-प्रेम और मुर्ख महासम्मेलन जैसे किस्सों ने इस लेख को
रोचक बना दिया।
बहुत धन्यवाद और बधाई।
स्वीकृति सूर्या
सृष्टि जी,
आलेख को पसंद करने और प्रतिक्रिया देने के लिए आपका बहुत
बहुत धन्यवाद।
डॉ. दिपक बमोला
सूर्यकांत जी, बहुत बढ़िया लेख। आपने हिंदी के प्रमुख साहित्यकार एवं
प्रेमी गोपाल प्रसाद व्यास जी के साहित्य यात्रा को बहुत रोचक ढँग से प्रस्तुत
किया है। आपको बहुत बहुत बधाई।
स्वीकृति सूर्या
दीपक जी,
व्यास जी के साहित्यदर्शन के लिए शब्द कम पड़ जाते है
इतना विस्तृत उनका साहित्य लेखन है। आलेख की सराहना के लिए आपका आभार।
डॉ. संजय सराथे
संगठन कर्ता, व्यंग्यकार, मर्मज्ञ साहित्यकार, राष्ट्रभक्त, राष्ट्रभाषा सेवक जैसे बहु प्रतिभा संपदा के धनी कवि पं. गोपाल प्रसाद व्यास को नमन ।
उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के सभी पहलुओं को आलोकित करने वाले साथी सूर्यकांतजी को बहुत-बहुत बधाई
एवं हार्दिक शुभकामनाएं।
संजय जी वक़्त निकालकर आपने यह लेख पढ़ा और अपनी प्रतिक्रिया दी यही इस रचना का मान है।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
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