सुर सम्राज्ञी भारतरत्न लता मंगेशकरजी को संगीतमय श्रद्धांजलि
दि. 19-02-22–दार-ए-सलाम, तंजानिया
श्रध्देया भारतरत्न लता जी की श्रद्धांजलि को ध्यान में रखते हुए भारत से बाहर
रहकर तंजानिया–इस्ट अफ्रिका के दार-ए-सलाम में भारतीय उच्चायुक्त तथा स्वामी
विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र द्वारा 'एक शाम लता के नाम'
का कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम की पूर्ण रूप
रेखा तथा प्रायोजन तंजानिया के सुप्रसिद्ध गायक और संगीतकार श्री बिपिन रायछेडा जी
के मार्गदर्शन में तैयार हुआ था। कार्यक्रम का पुर्ण संचालन श्रीमती स्वनील आशेर
जी ने किया। भारतीय उच्चायुक्त महोदय श्री बिनय प्रदान जी ने लता जी के तस्वीर पर
फूल परिदान करके भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। तत्पश्चात स्वामी विवेकानंद
सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक श्री संतोष जी.आर. जी ने अपने भावनामय शब्दों से लता
जी को याद कर उन्हें पुष्प पंखुड़ियों से श्रद्धांजलि अर्पित की। महोदय बिनय
प्रदान जी ने लता जी को सम्बोधित करते हुए कहा,
"दीदी कभी हमारे से अलग हो ही
नहीं सकती। उनकी आवाज, उनके स्वर और रोमांचित करने वाली मीठी धुन हमेशा ज़ेहन में
बसी रहेगी।" इस संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम में दस कलाकारों ने भाग लिया
था। श्री बिपीन रायछेडा जी ने आदरणीया लता जी और अपने गुरु ह्र्दयनाथ मंगेशकर जी
के साथ जो पल बिताये थे उन्हें स्मरणकर अपनी मधुर आवाज में कुछ गीत पेश किए। साथ
ही दार-ए-सलाम की मशहूर गायिका बनीता शाहदेव जी ने लता जी का 'अल्ला तेरो नाम और नाम गुम हो जायेगा'
गीत सुनाकर श्रोतागण को मोहित कर दिया। श्रीमती गौरांगी
भंडारे जो तंजानिया और भारत की प्रसिद्ध गायको में से एक है उन्होनें 'ऐ मेरे वतन के लोगों और रहे ना रहे हम'
गीत गाकर श्रोताओं को लता जी के आसपास रहने का आभास कराया।
उनके गीत पर तालियों की गडगडाहट से सभाभवन गूंज उठा। भारतीय उच्चायुक्त में ही
कार्यरत श्री मुद्रिका प्रसाद जी ने भी 'जनम जनम का साथ है'
गीत गाकर लता जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
अब बारी थी फरदिली अली की जो तंजानिया दार-ए-सलाम का एक आफ्रिकन छात्र होकर
अपनी मधुर आवाज और हिन्दी भाषा में 'तुझसे नाराज नहीं जिंदगी'
गा कर सच्चे मन से लता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि प्रस्तुत
की। आफ्रिकन युवा होकर भी भारत के उच्च श्रेणी के गायक के प्रति अपने गीत के
माध्यम से प्यार दिखाकर सभी को भावविभोर कर दिया।
श्री विवेक कलोलिया जी ने 'लग जा गले से'
लता जी के तस्वीर के सामने नतमस्तक होकर यह गीत प्रस्तुत
किया। अपने सुरों को छेड़ कर तंजानिया की गायक श्रीमती कृष्णा बुधिया जी 'सत्यम शिवम सुंदरम और जिंदगी प्यार का गीत है'
यह बेहतरीन गीत सुनाकर सभाभवन में लोगों को खड़े होकर
तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया।
एक और गायक जयंत वाठोरे जी ने 'ये जीवन है'
यह गीत सुनकर श्रोतागण को किशोर दा और लता जी के अनगिनत
गानो की याद दिलाकर समा खुशमय बना दिया। श्री हरविंदर सिंह अलग जी ने 'ये समा, समा है ये प्यार का'
गा कर सभागार में पूरा समा उत्साहित और जीवंत बना दिया।
गायक बिपिन जी ने पुनः कुछ गीत के टुकड़े पेश किए जिनका साथ तबला वादक श्री अम्रीतपाल
सिंह जी ने दिया और उन्होने अंत: सभी का आभार प्रदर्शित करके कार्यक्रम का समापन
किया। सम्पुर्ण कार्यक्रम का विस्तृत विवरण सूर्यकांत सुतार 'सूर्या' ने तैयार किया है।
दार–ए-सलाम, तंजानिया, इस्ट अफ्रिका
इमेल: surya.4675@gmail.com
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