१५ फरवरी २०२२ को प्रकाशित मशहूर शायर बशीर बद्र जी के आलेख पर हिंदी से प्यार हैं समूह के पाठकों की प्रतिक्रियाएं एव स्वीकृति
१५ फरवरी २०२२ को प्रकाशित मशहूर शायर बशीर बद्र जी के आलेख पर हिंदी से प्यार हैं समूह के पाठकों की प्रतिक्रियाएं एव स्वीकृति
https://hindisepyarhai.blogspot.com/2022/02/blog-post_15.html?m=1
डॉ. दिपक बामोला
बशीर बद्र सचमुच वो शायर हैं जिन्हें आम से ख़ास तक हर कोई पसंद करता है। सभी को उनका कोई न कोई शेर जरूर पसंद होगा। सूर्यकांत जी आपने इस लेख के माध्यम से बशीर बद्र जी को फिर से पढ़ने का मौका दिया। आपको इस उम्दा लेख के लिये बहुत बहुत बधाई।
स्वीकृति सूर्या
आदरणीय दीपक
जी,
बद्र
का मतलब ही पूनम का चांद होता है। तो जाहिर है बशीर जी नाम आते ही चेहरे पर
मुस्कराहट की तेज रोशनी चली आती है और उस पर उनकी शेर-ओ-शायरी तो गज़ल की आत्मा
बनकर महफ़िलो में गूँजती है। आलेख की सरहाना के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।
डॉ.जगदिश
व्योम
बशीर
बद्र जी पर लेख लगभग ठीक है.... बशीर बद्र अच्छे शायर हैं लेकिन विवादों में घिरे
रहे हैं... फिराक गोरखपुरी जी से तो तुलना करना बेमानी ही होगा...
स्वीकृति सूर्या
आदरणीय व्योम
जी,
आलेख
पर सटीक प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
अनुप
भार्गव
बशीर
बद्र मेरे पसंदीदा शायर है। उन से मिलने और उन के साथ मुशायरा पढ़ने का सौभाग्य भी
रहा।
जिस
ख़ूबसूरती और सरलता से वह बड़ी बड़ी बात कह देते हैं, वह
उन्हें ख़ास बनाती है। पिछली सदी के शायरों में अगर फ़ेहरिस्त बनाई जाए कि किस के
शेर सब से ज़्यादा उद्धृत किए जाते हैं तो शायद बद्र साहब का नाम उस में अग्रणी
होगा। ॰
फ़िराक़
साहब से उन की अनबन का पढ़ कर आश्चर्य हुआ। उन दोनो की उम्र में क़रीब ४० बरस का
फ़र्क़ था,
जब
फ़िराक़ साहब अपनी बुलंदी पर थे तब बशीर बद्र नौजवान शायर रहे होंगे। सुतार साहब
ने ज़रूर कहीं पढ़ा होगा इस के बारे में।
आलेख
बहुत अच्छा लगा।
स्वीकृति सूर्या
आदरणीय अनूप
दा
आपके
पास तो अनगिनत साहित्यकारों का नायाब खज़ाना है जो आप रोज किसी ना किसी साहित्यकार
को जिंदातिलिस्मत की तरह हमसे रूबरू कराते हैं। आलेख पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए
बहुत मायने रखती हैं।
** फ़िराक
साहब के साथ वाला किस्सा मैंने रेख़्ता पर पढ़ा था।
सरोज
शर्मा
सूर्यकांत
जी,
आसान
शब्दों में बड़ी बात कहने वाले शायर बशीर बद्र पर आपने भी सहज भाषा में उनके बारे
में लिखा है। जीवन की कठिनाइयों समेत उनके जीवन के सारे पन्ने खोलकर रख दिए आपने।
आलेख बहुत अच्छा लगा, इसके लिए आपको बधाई और धन्यवाद।
स्वीकृति सूर्या
सरोज
जी,
आलेख
को पसंद करने और अपनी विवेचना को प्रदर्शित करने हेतु आपका आभार।
आभा खरे
बहुत
बढ़िया आलेख। बशीर बद्र साहब के जीवन और रचनात्मकता से जुड़े सभी पहलुओं को समग्रता
के साथ समेटा है। सूर्यकांत जी को बहुत बधाई।
स्वीकृति सूर्या
खूब खूब
शुक्रिया आभा जी। आपकी समीक्षा अग्रिम लेख के लिए प्रोत्साहित करती है। धन्यवाद
शार्दुला
नोगजा
स्कूल
के ज़माने में जब इनटर्नेट नहीं था, तब भी कितने
ही farewells
में
“चरागों को आँखों में महफ़ूज़…” और “उजाले अपनी यादों के…” शेर हम नम आवाज़ में
बोला करते थे!
जब
बड़े हुए तो मुशायरों में बशीर साहब को सुन कर कितनी ग़ज़लें ज़बानी याद कर लीं!
ऐसे Quotable
quotes वाले
सादा ज़बान शायर का अंदाज़ ज़मीनी, शेर गहरे!
बढ़िया
आलेख है सूर्या जी! आपने बशीर साहब के कारनामे ही नहीं conflicts को
भी उजागर किया है, यह भी दर्ज होना ही चाहिए कहीं न
कहीं। शुक्रिया!
स्वीकृति सूर्या
शार्दूला
जी,
आपने सही कहा
बद्र साहब की शायरी या गजल इतने सरल शब्दों में होती थी कि एक दो बार पढ़कर ही उनको
अर्थतापूर्ण याद किया जा सकता है। बद्र साहब के आलेख ने आपको स्कूल के जमाने जी
याद दिला दी मतलब इस आलेख की समीक्षापूर्ती हो गई। आभार आपका प्रतिक्रिया के लिए।
रश्मी
झवार
जिस
तरफ भी चल पढ़ेंगे,रास्ता हो जाएगा।',क्या
बात है आदरणीय सूर्या जी,कमाल का आलेख
प्रस्तुत किया है शायर बशीर बद्र पर। बहित सहजता से उनके जीवन के प्रमुख पहलुओं पर
रोशनी डाली है। आपका आभार व हार्दिक बधाई।😊
स्वीकृति सूर्या
आदरणीया
रश्मि जी,
बद्र
जी के साहित्य की ख़ास बात यह है कि उनकी भाषा आवाम की भाषा होती थी जो आम लोगो के
जहन में भी घर कर जाती थी। आपका आलेख को पढ़कर सराहना करना यह मेरे लिए मेरे लेखन
को हौसला देने की राह है। आपका आभार
स्वरांगी
साने
उजाले
अपनी यादों के...कहने वाला शायर खुद अपनी याददाश्त भूल जाए,
इससे
त्रासद और क्या होगा...सूर्यकांत जी आपने बहुत सही शब्दों में उनका पूरा जीवन
समेटा है,
साधुवाद
स्वीकृति सूर्या
स्वरांगी जी,
आज
के दौर को बद्र साहब ने खूब लिखा है। बद्र साहब दो शेरों के बाद एक नुक़्ते के
इर्दगिर्द पूरे हालात का दायरा बनाते थे। आपने आलेख के द्वारा उनके जीवन की यात्रा
की और अपनी टिप्पणी यहाँ प्रेषित की इसलिए आपका आभार।
हरप्रीत
सिंह
सुंदर
आलेख है,
सूर्य
कांत जी। आपने बशीर बद्र जी के जीवन पर और शायरी पर काफ़ी जानकारी दी है। बधाई।
जीवंत मंच से सुना है इन्हें ।बशीर बद्र और वसीम बरेलवी मंच से अपनी अपनी विशिष्ट
अदायगी के साथ ग़ज़ल कहते रहे।सुनने वाले के लिये वाह कहना स्वाभाविक था। बशीर
बद्र हमेशा सरल शब्दों के बा-कमाल शायर
के रूप में याद किये जाएँगे।
स्वीकृति सूर्या
आदरणीय
हरप्रीत जी,
बड़ा अच्छा लगता
है जब आप,
अनूप
दा और समूह के अन्य लोग कहते की इस साहित्यकार के साथ कुछ पल बताए है या फिर इन
लोगो को आप प्रत्यक्ष रूप में मिल चुके है। यह जानकर मन खुश हो उठता है कि मैं
आपके जरिए उन साहित्यकारों तक पहुच रहा हूं। आलेख की सराहना करने के ख़ातिर आपका
बहुत बहुत शुक्रिया।
जवाहर सिंह गंगवार
वाह
वाह
बहुत
ही सुन्दर आलेख
बधाई
हो
स्वीकृति
सूर्या
आदरणीय जवाहर
जी,
आलेख
को पढ़कर उसकी प्रशंसा करने और अपनी बात रखने के लिए आपका आभार। धन्यवाद।
प्रो.
हर्षबाला शर्मा
अभी
अभी बशीर बद्र जी पर लेख पढ़ा सूर्या जी। बहुत बारीकी से लिखा है आपने। उनके जीवन
और ग़ज़ल के जीवन्त अंदाज़ को आपने भी उसी हुनर से उकेरा है। बधाई
स्वीकृति सूर्या
आदरणीया
हर्षबाला जी,
मुझे
खुशी है कि आपको आलेख पसंद आया और आपकी समीक्षा पाकर मेरा लिखना सार्थक हो गया।
आपके प्रसंशायुक्त शब्दों ने मेरी लेखनी को ऊर्जावान कर दिया है। बहुत बहुत आभार
आपका।
प्रगति
टिपणीस
सूर्यकांत
जी,
आपका
आलेख पढ़कर,
बशीर
बद्र की शायरी के बगल से फिर गुज़रकर, उसकी दिलकशी
से फिर बँध कर बहुत सुकून मिला, लेकिन बशीर
बद्र जी की मौजूदा हालत के बारे में जानकर दिल ग़मगीन भी हो उठा। सबके ज़हन में अपनी
शायरी की मधुर यादें छोड़ने वाला मक़बूल शायर आज अपनी ही याददाश्त खो बैठा है।
बहरहाल वे,
उनकी
यादें और उनके कमाल हमें हमेशा याद रहेंगे। आपको इस सुन्दर लेख के लिए बहुत-बहुत
बधाई।
मैं आपकी बात से सहमत हूं। मुहब्बत के शायर आदरणीय बद्र साहब का आज 86 वाँ जन्मदिन है। आज के दिन तो बस यही दुवा आ रही है कि अपनी मौजूदा बीमारी से बाहर निकलकर फिर से अपनी कलम का जादू चलाए। कितनी अजीब बात है बद्र साहब को शराब और सिगरेट तक का शौक नही था बस अपनी शायरी से मुहब्बत बाँटते फिरते थे। मरहूम शायर निदा फाजली उनकी आदतों पर कह गए हैं “जहां भी मिलते हैं, गजलें सुनाते हैं. ये बता कर कि शेर नए हैं.”😝 आलेख पर आपकी बधाई पा कर कलम की स्याही सुकून पा रही है। आपका धन्यवाद और सुखद अनुक्रिया के लिए आभार।
शायरी से इश्क़ करने वाला ऐसा कोई इंसान नहीं होगा जिसे बशीर बद्र साहब का कोई न कोई शे'र याद न हो ।
ReplyDelete"जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा" तो मेरे लिए जैसे प्रेरणा पुंज रहा है । आपका आलेख पढ़कर बहुत सारी नई जानकारियां मिली, लेकिन तकलीफ़ भी हुई उनकी हालत के बारे में जान कर । बहरहाल आपको खूबसूरत आलेख के लिए बहुत-बहुत बधाई और इन बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं को इस तरह संजो लेने के लिए भी बधाइयां
इस बात के लिए विशेष बधाइयां कि आप उन चंद ख़ुश किस्मतों में से हैं, जिन्हें उनका सानिध्य मिला ।