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Showing posts from January, 2022
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  जयशंकर प्रसाद - साहित्य में अभिव्यक्त युगबोध महाकवि जयशंकर  प्रसाद छायावादी कविता के आधार स्तम्भ है। उन्हीं की ' झरना ' प्रकाशित कृति से छायावाद कवि का जन्म हुआ था। जयशंकर प्रसाद को कवि युग कि चेतना स्वतंत्र रूप से प्राप्त थी। उनके ४८ वर्षो का जीवन काल बहुत ही संघर्षपूर्ण व चुनौतियों से भरा था। उनकी कविताओं में सौंदर्य दर्शन की चित्रात्मक विशेषता होती है। प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात राजनीतिक व्यवस्था बिखरी पड़ी थी। भारत गुलामी की जंजीर में जकड़ा हुआ था और उसी वक़्त हिन्दी के व्याकरण को सुव्यवस्थित करने के लिए खड़ी बोली को हिन्दी भाषा का मानक रूप देने का निर्णय लिया गया था। ऐसे में आदर्शवादिता मर्यादिवादिता और अतिरंजित नैतिकता का साहित्य मुक्त होने की कोशिश में था। उन साहित्यकार में सूर्यकांत त्रिपाठी ' निराला ' जी के साथ जयशंकर प्रसाद भी इस अभियान में शामिल होने निकल पड़े थे। व्यापार की असफलता के बाद जयशंकर  प्रसाद के परिवार को उज्जैन छोड़ काशी में स्थापित होना पड़ा और पिता के देहांत पश्चात उन्हें ही अपना खानदानी व्यापार सम्भालना पड़ा था। घर के वातावरण के कारण साहित्य...

पुस्तक समीक्षा: मातृभूमि के लिए (काव्य संग्रह)- डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

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  मातृभूमि के लिए (काव्य संग्रह)   रचनाकार -  डॉ. रमेश पोखरियाल ‘ निशंक ’ समीक्षक – सूर्यकांत सुतार ‘ सुर्या ’ पिनानी ग्राम पौडी गढवाल उत्तराखंड में जन्मे डॉ श्री रमेश पोख्ररियाल ' निशंक ' भारतीय राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ अत्यंत प्रभावशाली साहित्यकार और लेखक भी हैं। जिन्हें बचपन से कविता , कहानियाँ , लेख लिखने का बहुत शौक हैं। भले ही आप मौलिक रूप से साहित्यिक विधा के व्यक्ति हैं और प्रथम कविता संग्रह वर्ष १९८३ में ' समर्पण ' प्रकाशित हुआ हो परंतु उनकी कविताओ का चर्चा और प्रसिद्धि तो बहुत पहले से साहित्यकारों , रचनाकारों और श्रोताओं के दिल में घर कर चुकी थी। अब तक आप के १० कविता संग्रह , १२ कहानी संग्रह , १० उपन्यास , २ पर्यटन ग्रंथ , ६ बाल साहित्य , २ व्यक्ति विकास सहित कुल ४ दर्जन से अधिक पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैं। राष्ट्रवाद और देश सेवा की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी हुई हैं यही कारण हैं कि उनका नाम राष्ट्र कवियों की श्रेणी में भी शामिल हैं। राष्ट्रप्रेम को देखते हुए उन्होंने ' मातृभूमि के लिए ' काव्य संग्रह सन २००९ में प्रकाशित किया जिसमें राष्ट्रीय अस्मित...