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  भारत के विदेश मंत्री श्री एस . जय शंकर जी की तंज़ानिया यात्रा दि. ०८-०७-२०२३ भारत के विदेश मंत्री श्री एस. जय शंकर , देश की उच्चस्तरीय चर्चा , संयुक्त आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता और प्रमुख नेताओं से बातचीत करने पूर्वी अफ्रीका के देश तंज़ानिया और ज़ांज़ीबार के दौरे पर आए थे। ज़ांज़ीबार में भारत तंजानिया के उच्च युक्त श्री बिनय प्रधान और उप उच्च युक्त श्री मनोज बिहारी जी ने विदेश मंत्री का स्वागत किया। इसके अतिरिक्त ज़ांज़ीबार में भारत के आई आईटी मद्रास की मदद से नया आई आईटी पार्क का उद्घाटन करना श्री एस जय शंकर का मुख्य उद्देश्य था। विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान ज़ांज़ीबार में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आईटी) -मद्रास के पहले विदेशी परिसर की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस दौरे के दौरान उन्होंने एक जल आपूर्ति परियोजना का भी निरीक्षण किया और भारत सरकार द्वारा क्रेडिट लाइन के माध्यम से वित्त पोषित किया गया। उन्होंने ज़ांज़ीबार के राष्ट्रपति हुसैन म्वैनी एवं पर्यटन मंत्री सिमाई सईद और कुछ प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की। उसी समय ज़ांज़ीबार पोर्ट पर आ...

श्री स्वामी विवेकानंद का राष्ट्र को आवाहन

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  श्री स्वामी विवेकानंद का राष्ट्र को आवाहन भारतीय जीवन शैली , दर्शन और आध्यात्मिकता के प्रतीक और उसके स्वरूप में भारतीय व्यक्तित्व के बुद्धिजीवी स्वामी विवेकानंद जी को ही देखा जाता है। उनके विचारों ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व भर में अनेक राष्ट्र को प्रभावित किया है। उनके वेदांत दर्शन के रूप में सच्चे कर्म योगी ने पश्चिमी दुनिया में भी भारत की स्थायी रुचि और भारतीय जीवन को पुनर्जीवित किया है। उनके नव-वैदांतिक दर्शन से मानव जीवन का उद्देश्य लेकर उन्होंने पूरे राष्ट्र को आवाहन करते हुए कहा है कि मानव जीवन का उद्देश्य सार्थक , निस्स्वार्थ और सेवा - भाव वाला होना चाहिए। हमारा जीवन केवल एक अस्तित्व ही नहीं बल्कि दूसरों की मदद करने और उनकी सेवा करने वाला व्यतीत होना चाहिए। एक सार्थक जीवन वही कहलाता है जो मनुष्य के भीतर विकसित होने के साथ बाहर दूसरों के जीवन को भी विकसित किया जा सके। स्वामी जी के अनुसार एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण व्यक्ति के सुचरित्र निर्माण से शुरु होता है। राष्ट्र में नागरिकों का चरित्र व्यक्तित्व विकास निर्माण के साथ राष्ट्र के विकास का भी महत्त्वपूर्ण भाग है। उनके...
कुरीतिमुक्त हास्य कवि – प्रभुलाल गर्ग उर्फ काका हाथरसी आलेख लेखक-  सूर्यकांत सुतार , दार-ए-सलाम , तंजानिया दिन अठ्ठारह सितम्बर , अग्रवाल परिवार उन्नीस सौ छ: में लिया , काका ने अवतार अपने ही जन्म-दिवस को हास्य में परिवर्तित करने वाले महान हास्य कवि श्री प्रभुलाल गर्ग उर्फ काका हाथरसी का जन्म अग्रवाल परिवार में १८ सितंबर १९०६ में हुआ। काका ने अपने जन्म का विवरण कुछ इस प्रकार बताया है, ‘हाथरस की रसील हास्यधरती पर हमारा अवतरण मध्यरात्रि में हुआ। ग़रीबी के कारण घर में घड़ी तो होती नहीं थी तो हमारे पड़ोसी प. दिवाकर जी शास्त्री ने १८ तारीख की शुभ घड़ी क़ायम करके हमारी जन्म कुंडली घोषित कर दी। उन दिनों जन्म-मरण की सूचना घर की महतरानी दिया करती थी। अतः जन्म होते ही पूरे मुहल्ले में चर्चा हुई ' शिब्बो के लड़का हुआ है’। काका के पिता का नाम शिवलाल गर्ग था , जिन्हें कुछ लोग शिब्बो जी कहा करते थे। जन्मदात्री माता जी का नाम था बर्फी देवी। अब इतनी मीठी मैया की कोख से जन्म लेनेवाला बालक मधुरस या हास्यरस से ओतप्रोत हुआ तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है ? हल्ला हो गया मोहल्ला में कि शिवलाल के ज...