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डॉ. रामदरश मिश्र की साहित्यिक जीवन यात्रा

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  डॉ. रामदरश मिश्र की साहित्यिक जीवन यात्रा जिनके साहित्य में ग्रामीण भारत की समस्याएँ , अपनो के दर्द , सामंतीय आचरण , दरिद्रता , गरीबी , मान-अपमान , अपने अहम पर जीता समुदाय और भूख से विवश होते दलित और वंचित समाज का दर्शन होता है ऐसे साहित्यकार की पाठनीयता कभी आँखों से ओझल नहीं हो सकती। इनकी रचनाओं में भारतीय देहात का महासागर होता है और एक विश्वसनीय सुपरिचित आंदोलन तैयार होता है जो समय के गुजरे शोर-शराबे , अनुभव , बोध और रुपबंध के स्तर पर वैविध्यपूर्ण विधाओ को रचनात्मकता का रूप देकर साहित्यिक जगत में समृद्ध करते हैं। इनको महान साहित्यकार रेणू और प्रेमचंद के बाद की पीढी के रचनाकार के ख्याति प्राप्त है। हम बात कर रहे हैं हिन्दी जगत के सुप्रसिद्घ साहित्यकार डॉ रामदरश मिश्र जी की। अपने उम्र की ९९ वर्ष के पड़ाव के बाद भी मिश्र जी का व्यक्तित्व तेजोमय और वाणी में संघर्ष का ओज दिखाई पड़ता है। डॉ॰ रामदरश मिश्र का जन्म १५ अगस्त १९२४ को गोरखपुर के कछार जिले के अंचल प्रांत के डुमरी गाँव में हुआ। उस वक्त उनका गाँव पिछडे गांवों की सूची में आता था। यह गाँव राप्ती और गौरी नदी के बीच स्थित है इस...